devesh shastri

Thursday, July 2, 2009

धर्म ध्वजा फहराएं

सदाचार का पाठ पदाते युग के युग बीते हैं
दुराचार की अति के आगे सदघट सब रीते हैं

नहीं पाठ्यक्रम सफल हो सके सिद्ध प्रयोग हुए हैं
कटु औषधि के द्बारा ही मन-देह निरोग हुए हैं

असत, अधर्म, भ्रष्टता, आपाधापी बहुत गा चुके
अलंकरण सम्मान, प्रशस्ती आख़िर बहुत पा चुके

बंद करो यह पाठ पढाना बिगुल फूंक दो रन का
सत्य धर्म की ध्वजा उठाकर पालन होवे प्रण का

जब संघर्ष छेड़ दोगे तब निश्चित जे पाओगे
अगर नियति कह रहे टालते भय पर भय खाओगे

कलम मार्ग दर्शक है तो फ़िर तोप बनानी होगी
स्याही की बूंदें बम की सामर्थ्य समानी होगी

माखन-लेपन नहीं मित्र पेट्रोल छिड़कना होगा
चांदी नहीं, चर्म का जूता जमकर जड़ना होगा

लंका में चढ़कर ही रावण को सदगति देनी होगी
दह में कूद कालिया नथ यमुना पवित्र करनी होगी

असत अधर्म अकर्म दुर्ग पर चढ़ परचम लहराओ
सत्यमेव जयते सार्थक कर धर्म ध्वजा फहराओ
-देवेश शास्त्री

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