
Monday, January 31, 2011
Saturday, January 8, 2011
नव वर्ष 2011
नए साल में साथियों करना है कुछ ख़ास।
जन - मन में जाग्रत करें , उत्पाटित विश्वास ॥
विश्व टिका विश्वास पै, कहते हैं विद्वान ।
तोड़ दिया विश्वास जब कैसे हो कल्याण ।।
तभी व्यवस्था भंग है मची है लूट खसोट ।
दांव न कोई छोड़ता ढीली पड़ी लंगोट ॥
ग्यारह का शुभ अंक ही लायेगा शुभ योग ।
होगा तांडव रूद्र अब धमद्धमद संयोग॥
जिससे टूटेगा सुनो अविश्वास का फंद।
तब विश्वासी पुष्प का फैलेगा मकरंद॥
आयेगा विश्वास जब बदलेगी तस्वीर।
कदाचार के अंत से मिट जाएगी पीर॥
नयेवर्ष में सत्य की धरी जाएगी नींव।
असमय ही मर जायेंगे अवसरवादी क्लीव॥
ग्यारह में दिख जाएगा बारह का फिर रंग।
कदाचार के अंत को रुद्राणी की चंग॥
नव दर नव संवत मिले त्रयोदशी अनुमान्य।
जन-मन सन्मय होयगा आये सत साम्राज्य॥
जन - मन में जाग्रत करें , उत्पाटित विश्वास ॥
विश्व टिका विश्वास पै, कहते हैं विद्वान ।
तोड़ दिया विश्वास जब कैसे हो कल्याण ।।
तभी व्यवस्था भंग है मची है लूट खसोट ।
दांव न कोई छोड़ता ढीली पड़ी लंगोट ॥
ग्यारह का शुभ अंक ही लायेगा शुभ योग ।
होगा तांडव रूद्र अब धमद्धमद संयोग॥
जिससे टूटेगा सुनो अविश्वास का फंद।
तब विश्वासी पुष्प का फैलेगा मकरंद॥
आयेगा विश्वास जब बदलेगी तस्वीर।
कदाचार के अंत से मिट जाएगी पीर॥
नयेवर्ष में सत्य की धरी जाएगी नींव।
असमय ही मर जायेंगे अवसरवादी क्लीव॥
ग्यारह में दिख जाएगा बारह का फिर रंग।
कदाचार के अंत को रुद्राणी की चंग॥
नव दर नव संवत मिले त्रयोदशी अनुमान्य।
जन-मन सन्मय होयगा आये सत साम्राज्य॥
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