सम्पति के अभिमान में, झूम रहे श्रीमान
नहीं समझते किसी को, चला रहे अभियान
चला रहे अभियान, मान सम्मान न जानें
दिया मूत का जला जला के, पर के तानें
कहें सुकवि देवेश चैन नहि है दम्पति को
जाना खाली हाथ, जोड़ते गिन सम्पति को
- देवेश शास्त्री
Thursday, July 2, 2009
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