जो वास्तव में पात्र है , वह क्यों करे प्रयास ?
भीड़ अपात्रों की जुडी , व्यर्थ होय उपहास॥
व्यर्थ होय उपहास, दास को चुनना होगा ,
मतदाताओं को ही, तानाबाना बुनना होगा,
कहें सुकवि देवेश , लुटेरे तो कुपात्र हैं।
खोजो अपने बीच, मिलेंगे जो सुपात्र हैं॥
Wednesday, January 18, 2012
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