devesh shastri

Wednesday, September 23, 2009

हुई सुहानी शाम

बाप खुशी से झूमता , पीकर प्यारे जाम।
मिला बजीफा पूत को हुई सुहानी शाम॥
हुई सुहानी शाम, काम अब राम करेंगे,
सरकारी स्कीमें पाकर पेट भरेंगे,
दंद फंद ही जीवन उनका दाम उसी से।
नाकारा ये बाप देखिये मगन खुशी से॥
देवेश शास्त्री

No comments:

Post a Comment