दशहरा मेला
रामलीला मैदान में एकत्रित हजारों दर्शक,
राम और रावण में चला काफी देर युद्ध ,
मंच के नजदीक बना था रावण का पुतला जो बन उस वक्त तमाशा
जब काफी मशक्कत के बाद भी नही फुक पाया
फुका भी, तो आधा - अधूरा ।
लोग ठहाका मारकर हंसपड़े , बात ही कुछ ऐसी थी ।
मेरे मन में विचार आया - अब न्याय के हाथों अन्याय , सद्वृत्ति के हाथों दुर्वृत्ति,
सत्य के हाथों असत्य व सदाचार के हाथों आनाचार का दहन मुश्किल है ,
किंतु काफ़ी जद्दोजहद के बाद पुतला फुक दिया गया।
तब विचार इस निष्कर्ष पर पहुचा सत्य, न्याय, सद्वृत्ति व सदाचार जीतेंगे मगर परेशान कितने ही क्यों न हों।
Monday, September 28, 2009
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