इटावा हिंदी सेवा निधि के १९ वें सारस्वत समारोह में हिंदी की बदहाली पर चिंता जताई गई और हिंदी के सम्मान का रोना रोया गया। सवाल उठता है कि हिंदी पर सम्मान का रोना क्यों है और कब तक रहेगा ? १४ सितम्बर को हर साल सम्मान का रोना रोया जाता है। सोचो जिम्मेदार कौन है
न केबल हिंदी बल्कि सभी भारतीय भाषाए इंग्लिश द्वार ऐसे हाई जेक की गई हैं जैसे अंग्रेजी रूपी खडग सिंह ने भारती की जुबान रूपी घोडा हाई जेक कर लिया हो।
Saturday, December 24, 2011
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment