devesh shastri

Monday, July 4, 2011

आज जो भी समस्याए दिख रही हैं उनका एक कारण हमारा संस्कृत से दूर होना तथा उसे सम्मान की बजाय हेय दृष्टि से देखना है। आप हिंदी की वकालत करते हो , जरूरी है । हिंदी को आज तक वह दर्जा नही मिल पाया जो मिलना चाहिए । आज जो स्थिति संस्कृत की है वही कल हिंदी की होगी। क्योकि जैसे संस्कृत को रोजी रोटी से काट दिया गया वैसे ही हिंदी को भी काटा जा रहा है। संस्कृत दा मौज कर रहे है, कथा भागवत प्रवचन ज्योतिष दान धर्म से। जबकि हिंदी दा क्या करेंगे? चिंता का विषय है। हिंगलिश के भूत ने हिंदी को संस्कृत

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