इटावा, पञ्च संस्कृतियों का संगम
ब्रज, अवधी, बुन्देली, कन्नोजी, पांचाली
यह जनपद सदैव से साहित्यिक उर्वरा भूमि रही है।
यहाँ के पञ्च नद संगम स्थित भरेह में रजा भगवंत राव के प्रश्रय में
महाकवि नीलकंठ भट्ट ने मयूखों के साथ ज्योतिष ग्रन्थ भगवंत भाष्कर की रचना की।
बाबा तुलसीदास ने यहीं लंकाकाण्ड का कुछ भाग रचा।
बैष्णव सम्प्रदाय के संत स्वामी गोविन्दवर दास के शिष्य श्रीमन्नाचार्य ने
राम चरित मानस का संस्कृत में काव्यानुवाद किया।
गंग, देव, शिशु, बल्लभ, श्रीनारायण भैयाजी, गंगहरी, पंगु, गिरजेश, अम्बर और पद्मश्री नीरज की
यह धरा सदैव से इटावी ठसक के लिए विख्यात है।
Wednesday, February 17, 2010
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